Main Aur Mera Gaon

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Title Details
Book Title Main Aur Mera Gaon
ISBN 978-93-89947-65-6
Product Form Paperback / softback
Language Hindi
Genre Literature
Name of Publishing Agency/Publisher Excel India Publishers
Name of Author/Editor Author: Nanak Chand
Publication Date 28-02-2025

 

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Description

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कहते है सन् 1400 के आसपास कुछ परिवारों में यहाँ डेरा डाला और फारसी नाम दिया ‘झाँईरसा’ जिसका हिन्दी अनुवाद होता है – ‘पड़ाव’।

तदन्तर इसका नाम झाड़सा पड़ गया। उसके लगभग 300 साल बाद तक यह एक छोटी-मोटी ढाणी ही बना रहा। बदलते वक्त के साथ इस क्षेत्र का चहुंमुखी विकास हुआ और प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र ‘परगना झाड़सा-बादशाहपुर’ कहलाने लगा। कालान्तर में यह इलाका जयपुर नरेश व उसके बाद अलवर नरेश, बेगम समरू व अंग्रेजों के आधिपत्य में आया।

बेगम समरू (1753-1836) एक बहुत ही दबंग शक्तिशाली महिला थी व उन्होंनें एक फ्रेन्च सेनाधिकारी वाल्टर रीनहर्डट सोम्ब्रे से विवाह किया था। एक मुगल बादशाह ने उन्हे सरधना (उत्तर प्रदेश) की जागीर प्रदान की थी। बाद वर्षों में मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने उन्हें विशेष ईनाम के तौर पर टपुकड़ा की जागीर प्रदान की जिसका झाड़सा-बादशाहपुर एक परगना था। अपनी जागीर में उन्होंनें तीन शानदार हवेलियाँ बनवाई – सरधना, चाँदनी चौक व झाड़सा- जो आज सरधना कोठी, भगीरथ पैलेस व हमारे गाँव में महल के नाम से जानी जाती है। यह हवेलियाँ क्रमशः उनके निजी आवास, दिल्ली प्रवास व परगना झाड़सा के वजीर के आवास हेतु बनवाई गई थी। उन्होंनें इस महल से कुछ ही दूर एक हवेली अपने फौजदार के लिए भी बनवाई जो आज मौहल्ला सुनारान में स्थित है व कुछ परिवर्तन के बाद उसमें आज सोनी परिवार रह रहे हैं।

अपनी ताकत दिखाने के लिए अंग्रेजों ने वर्तमान उपायुक्त आवास गुरूग्राम के सामने ‘जॉन हॉल’ नाम की एक इमारत बनवाई ताकि लोग-बाग समरू/ झाड़सा महल को भूल जाएँ। हमारे गाँव की मोहियाल कॉलोनी में एक फ्रेन्च सेना अधिकारी मेजर जीन एटियेन की समाधि है, जिसे ‘फ्रांसीसी स्मारक’ कहा जाता है।